क्यों होता है बार- बार गर्भपात, जानिए इस समस्या के बारे में

बार-बार गर्भपात और बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इसका एक कारण आशरमेंस सिंड्रोम हो सकता है। यह गर्भाशय से जुड़ी एक स्थिति है जिसमें गर्भाशय व सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) के आपस में चिपकने से आशरमेंस सिंड्रोम की स्थिति बनती है। रोग की गंभीरता इनके आपस में चिपकाव की स्थिति पर निर्भर करती है। जानते हैं इसके बारे में...

लक्षण पहचानें
बार-बार गर्भपात होना और बांझपन इसके प्रमुख लक्षण हैं। इससे पीडि़त महिलाओं को असामान्य माहवारी की शिकायत होती है। जबकि कुछ महिलाओं में पीरियड्स आते नहीं या तय समय पर पीरियड्स न होकर सिर्फ दर्द का अहसास होता है। दर्द इस बात का संकेत है कि पीरियड आ तो रहा है, लेकिन चिपकाव के कारण सर्विक्स में ब्लॉकेज आ जाती है जिससे ब्लड गर्भाशय से बाहर नहीं निकल पाता है।

प्रमुख कारण

प्रसव के बाद प्लेसेंटा को हेमरेज या इच्छा
से करवाए गए गर्भपात के दौरान गर्भाशय में हुए प्लेसेंटा के फैलाव के कारण यह होता है। प्रसव के दौरान फाइब्रॉयड या पॉलिप्स निकालने के लिए की गई सर्जरी, जननांगों की टीबी या संक्रमण अहम कारण हैं।

हिस्ट्रोस्कोपी से पहचानें
हिस्ट्रोस्कोपी से गर्भाशय में देखकर आसामान्य ब्लीडिंग के कारणों का पता लगाकर इलाज करते हैं। यह डायग्नोस्टिक (गर्भाशय की समस्याओं का परीक्षण करना) व ऑपरेटिव (आसामान्य स्थिति को ठीक करते हैं जिसका डायग्नोस्टिक में पता चलता है) दोनों होती है। लाइट लगी हुई एक पतली ट्यूब से गर्भाशय व अन्य अंदरूनी हिस्सों को जांचते हैं।

फायदे : दूसरे टैस्ट के मुकाबले हिस्ट्रोस्कोपी के दौरान अस्पताल में ज्यादा दिन नहीं रुकना पड़ता व रिकवरी जल्दी होती है। सर्जरी के बाद दर्द दूर करने के लिए ज्यादा दवाइयां नहीं लेनी पड़ती और हिस्टेरेक्टॉमी की प्रक्रिया से भी बचा जा सकता है।

इलाज
इलाज के बाद भी चिपकाव की स्थिति हो सकती है। एस्ट्रोजन सप्लिमेंट्स देेने के अलावा ऑपरेशन के तुरंत बाद की हीलिंग प्रोसेस के दौरान गर्भाशय की वॉल्स फिर से न चिपकें इसके लिए उनके बीच स्प्लिंट या बलून लगा देते हैं।

जटिल स्थिति में: इस सिंड्रोम से बांझपन, गर्भपात, गर्भाशय की अंदरूनी ग्रोथ नहीं होती। पीरियड्स में कमी गर्भाशय की लाइनिंग के पूरी तरह नष्ट होने या फिर सर्विक्स-गर्भाशय के पिछले भाग में बाधा आने से होती है। इससे माहवारी या तो गर्भाशय के अंदर ही होती है या फिर ब्लड के एब्डॉमिनल कैविटी में जाने से एंडोमेट्रियोसिस होता है। सिंड्रोम के रोगी में मेनोपॉज से पहले या बाद में गर्भाशय का कैंसर हो सकता है।

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