अच्छी सेहत के लिए स्नैकिंग हैबिट को सुधारना जरूरी, जाने क्यों

चौबीस वर्षीय दीक्षा लंच, डिनर सेहतमंद, हल्का व पौष्टिक करती है फिर भी अक्सर उसे तरह-तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। पेट दर्द, डायरिया, अधिक कोलेस्ट्रॉल, तो कभी ओवरवेट होने की समस्या आदि। डॉक्टर से मिलने पर उन्हें भी यही बताती है।

उसकी इन बातों के बीच एक कड़वा सच छिपा हुआ है, जो दीक्षा किसी को नहीं बताती व न खुद समझ पाती। दरअसल वह लंच, डिनर के बीच स्नैक्स के रूप में कभी पकौड़ा, समोसा , कचौड़ी, भुजिया, बर्गर, पिज्जा खाती रहती है। सुबह के नाश्ते में सब्जी, कचौड़ी व जलेबी तो शाम को चाय के साथ हैवी चीजें खाती है। ऐसे में हल्के लंच या डिनर का कोई मतलब नहीं रह जाता।

ईमानदारी बरतें
अगर सचमुच हैल्दी रहना है तो खुद के प्रति ईमानदारी बरतें और हैल्दी स्नैकिंग हैबिट अपनाएं। मार्केट रिसर्च फर्म मिंटेल ने शोध में पाया है कि नई पीढ़ी में दिन में ४ बार या उससे भी ज्यादा बार स्नैक्स के रूप में जंकफूड, पैक्डफूड और स्ट्रीटफूड खाने की आदत है। जिस चीज पर ऑर्गेनिक, नैचुरल आदि लिखा देख लिया, उसे बिना सोचे झट खरीद खाने लगते हैं। हालांकि हैल्थ एक्सपर्ट भी दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाते रहने की सलाह देते हैं। ऐसे में वे मार्केट में उपलब्ध चिप्स, भुजिया, बिस्किट आदि खा लेते हैं। जबकि लंच और डिनर के बीच दिन में चार बार अलग-अलग फल, भुने चने, बादाम, मुरमुरे, पोहा, इडली, ड्रायफू्रट, खीरा-टमाटर जैसे हैल्दी फूड्स लेने चाहिए।

हृदय, फेफड़ों पर असर
जंकफूड और तेल-घी युक्त फूड को पचाने के लिए हमारे पाचनतंत्र को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसका नकारात्मक असर हृदय व फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। ऊटपटांग खाने की आदत से रोग प्रतिरोधक तंत्र ? भी कमजोर होता है और पाचनतंत्र भी गड़बड़ा जाता है। मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याओं की जड़ में भी ओवरईटिंग या बैड स्नैकिंग हैबिट ही है। इसलिए खानपान में सेहतमंद आदतों को अपनाएं। ऐसे चीजें खाएं जिससे खासकर पेट संबंधी दिक्कतें न हों।

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