खुलकर छींकें, नहीं तो हो जाएंगे बीमार

क्या आप भी नाक और मुंह बंद कर छींक रोकने की कोशिश करते हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि छींक रोकने का विपरीत असर कान, दिमाग, गर्दन और डायफ्रॉम तक पर पड़ सकता है।

ब्रिटेन में आया मामला
हाल ही ब्रिटेन के लीसेस्टर विश्वविद्यालय में एक ऐसे ही पेशेंट का इलाज किया गया। छींक रोकने की वजह से व्यक्ति के गले में झनझनाहट पैदा हुई और गला भी सूज गया। इसके बाद उसकी आवाज भी चली गई। सात दिन के इलाज के बाद उसकी तकलीफ कम हुई। भारतीय मूल के डॉक्टरों ने भी लोगों को छींक न रोकने के लिए चेताया।

ऐसे बढ़ता है खतरा
दरअसल छींक से शरीर को बीमार करने वाले बैक्टीरिया बाहर निकलते हैं और ऐसा नहीं होने पर बैक्टीरिया अंदर ही रहते हैं और बीमारियों का कारण बनते हैं। इसी तरह से छींक रोकने से मस्तिष्क की नसें भी फट सकती हैं। इसके अलावा कानों पर भी इसका असर पड़ता है और सुनने की शक्ति भी जा सकती है।

काली मिर्च
काली मिर्च का सेवन करने पर बैक्टीरिया से छुटकारा मिलता है। गुनगुने पानी में काली मिर्च पाउडर डालकर पी सकते हैं या गरारे भी कर सकते हैं।

ऐसे रोकें यह बीमारी
छींक अक्सर सर्दी-जुकाम या अन्य कारणों से आती है। लेकिन कई बार एलर्जी या किसी अन्य कारण से कुछ लोगों को लगातार छींक आती रहती है। ऐसे में छींक को जबरदस्ती रोकने की बजाय कुछ साधारण घरेलू उपाय अपनाकर छींक आने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए।

अदरक
एक कप पानी में अदरक डालकर उबालें और गुनगुना होने पर इसमें शहद मिलाकर पीएं। कच्चा अदरक या अदरक वाली चाय का सेवन भी किया जा सकता है।

लहसुन
इसमें भी एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो सांस संबंधी संक्रमण को ठीक करते हैं। रोजाना लहसुन की एक या दो कली का कच्चा सेवन करें या पांच से छह लहसुन की कलियों को पेस्ट बनाकर सूंघेंं।

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