थोड़ी सी एक्सरसाइज भी आपको रखेगी तंदुरुस्त

नए साल पर जितने गर्मजोशी से आपने फिटनेस को लेकर जो संकल्प लिया था, क्या उस पर अमल कर रहे हैं? अगर आप भी फिटनेस से जुड़ी कुछ बातों को लेकर कंफ्यूज हैं और एक्सरसाइज से दूरी बना रहे हैं, तो हम यहां ऐसी ही कुछ बातों का जिक्र कर रहे हैं, जिससे आप फिटनेस की ओर आसानी से कदम बढ़ा सकते हैं।

जितना पसीना निकलता है, उतनी कैलोरी बर्न होती है?
ज्यादातर लोगों का मानना होता है कि जितना ज्यादा पसीना निकलता है उतना ही कैलोरी बर्न होता है लेकिन हकीकत में इसका कैलोरी बर्न संबंध नहीं होता है। शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पसीना आना स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। यह त्वचा को ठंडी रखने में मदद करता है। समान अवधि तक एक्सरसाइज करने पर कई लोगों को ज्यादा पसीना आता है, तो कई लोगों को कम। इसका मतलब यह नहीं कि एक की कैलोरी ज्यादा बर्न हुई और दूसरे की नहीं।

40 से ६० मिनट एक्सरसाइज करने का ही फायदा होता है?
वास्तविकता में रोजाना 10 मिनट की एक्सरसाइज भी कार्डियोवेस्कुलर हैल्थ के लिए लाभदायक होती है। अहम बात यह है कि नियमितता होनी चाहिए और हर दिन अलग-अलग एक्सरसाइज करना चाहिए। वक्त हो तो दिन भर में 10-10 मिनट के तीन सेशन भी बांट सकते हैं। शॉर्ट वर्कआउट्स इन दिनों काफी पॉपुलर हो रहे हैं।

योग करने से ज्यादा कैलोरी बर्न नहीं होती है?
योग से शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है और स्ट्रेंथ आती है। यह एरोबिक एक्टिविटी की तरह नहीं होती है लेकिन 50 मिनट का पावर योग से 237 कैलोरी बर्न होती है।

किसी कारण से वर्कआउट करना बंद हो जाए तो वजन काफी बढ़ जाता है?
वर्कआउट बंद करने और मसल्स के टिश्यू के फैट में बदलने का सीधा संबंध नहीं होता है। मसल्स वाले लोग भी उम्र के अनुसार मेटाबॉलिज्म और हॉर्मोन की मात्रा में कमी आने से मोटे होने लगते हैं। हैल्दी डाइट लेते रहने से वजन में खास अंतर नहीं आता है।

फ्लैट एब्स के लिए क्रंचेज जरूरी एक्सरसाइज होता है?
पेट की एक्सरसाइज के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है लेकिन यह पूरी तरह से कैलोरी बर्न नहीं करता है। इससे एब्स का कुछ भाग टोन होता है। हालांकि क्रंचेज करने के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि गलत पोजिशन या कर्व से रीढ़ की हड्डी में दर्द हो सकता है।

वजन घटाने के लिए फैट्स का सेवन बंद कर देना चाहिए?
हकीकत में हमारे शरीर को फैट्स की उतनी ही जरूरत होती है जितना पानी। हमें बैड और गुड फैट्स की पहचान होनी जरूरी है। गुड फैट शरीर की बहुत सी क्रियाओं को सुचारू रखने में मददगार होते हैं और हॉर्मोंस को सक्रिय करते हैं। सभी तरह के फैट, सैचुरेटेड और ट्रांस फैट हमारे लिए जरूरी होते हैं।

एरोबिक एक्सरसाइज से मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है?
रोजाना 30 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज का सीधा असर मेटाबॉलिज्म रेट पर पड़ता है और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा इससे ब्लड शुगर, कॉलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी कम होता है।

फिटनेस के लिए कभी भी दौड़ा जा सकता है?
अचानक से दौडऩे से पहले वॉक करना चाहिए। दौड़ लगाना आसान तरीका लगता है लेकिन इसके लिए भी वॉर्मअप जरूरी होता है। सबसे पहले चलना शुरू करना चाहिए, इसके बाद तेज चाल से चलना चाहिए, फिर कम स्पीड में दौडऩा चाहिए और बाद में एनर्जी के साथ दौड़ लगानी चाहिए।

एक्सरसाइज करने वाले कुछ भी खा सकते हैं?
ऐसा नहीं है। एक्सरसाइज करने का मतलब यह नहीं होता कि आप अनहैल्दी फूड खाएं क्योंकि इसा विपरीत प्रभाव स्वास्थ्य पर तो पड़ेगा ही। इसी तरह ज्यादातर लोग मानते हैं कि एक्सरसाइज करने वालों को अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। लेकिन एक स्वस्थ शरीर के लिए कार्बोहाइडे्रट, फैट, विटामिन और मिनरल्स भी जरूरी होते हैं।

स्टे्रचिंग से बॉडी को रिकवर होने में मदद मिलती है?
स्ट्रेचिंग से पूरी तरह से मसल्स टिश्यू रिकवर नहीं होते हैं और न ही मसल्स का दर्द कम होता है लेकिन इससे जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है। हकीकत में वॉर्मअप या एक्सरसाइज के तुरंत बाद स्टे्रचिंग करना चाहिए।

ज्यादा एक्सरसाइज नुकसानदायक होती है?
ज्यादा एक्सरसाइज से मसल्स और जोड़ों पर गलत असर पड़ता है। सप्ताह में कम से कम पांच दिन सीमित अवधि में व्यायाम करने पर फिटनेस और एनर्जी लेवल में सुधार आता है। रेस्ट करने पर मसल्स भी रिकवर होती हैं और उनका विकास होता है।

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