स्टार्टअप की पहल: विद्यार्थियों के लिये क्रिकेट बैट, गिटार, किताबों से लेकर फर्नीचर तक किराये पर उपलब्ध

Publish Date:Thu, 08 Feb 2018 06:38 PM (IST)

नई दिल्ली (टेक डेस्क)। विद्यार्थियों को महंगी पढ़ाई के साथ ही अन्य जरूरतों पर होने वाले खर्च से राहत देने के लिए एक स्टार्टअप ने अनोखी पहल की है। इसके तहत क्रिकेट बल्ले एवं टेनिस रैकेट जैसे खेल का सामान, पाठ्य पुस्तकें, इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में इस्तेमाल होने वाला सामान, फर्नीचर आदि एक दिन से लेकर छह महीने तक के किराये पर उपलब्ध कराया जाता है। ‘स्टार्टअप पुस्तक कोष रेंटल्स’ की इस पहल के तहत वन स्टॉप रेंटल सॉल्यूशन पेश किया गया है। यह सॉल्यूशन पूरी तरह विद्यार्थियों पर केंद्रित है।

पुस्तक कोष के सह-संस्थापक शचिन्द्र शर्मा ने कहा, ‘‘पाठ्य पुस्तकें हम पहले से छात्र-छात्राओं को उपलब्ध करा रहे हैं। अब हमने उनकी जरूरत का अन्य सामान भी किराये पर उपलब्ध कराना शुरू किया है।’’ शर्मा कहते हैं कि कुछ पाठ्यपुस्तकों को छोड़ दें तो कॉलेज के छात्र-छात्राओं की कोई भी जरूरत कुछ समय के लिए होती है। किराये पर अपनी जरूरत का सामान लेकर वे 65 से 70 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थियों को किसी किताब की जरूरत सिर्फ परीक्षा के समय होती है। ऐसे में 500-600 रुपये की पुस्तक खरीदना उनको महंगा पड़ता है। इसी तरह कॉलेज में किसी समारोह या सीखने के लिए उन्हें गिटार या अन्य संगीत साज या खेलकूद के लिए क्रिकेट बैट या टेनिस रैकेट अथवा कंप्यूटर टेबल-कुर्सी की जरूरत भी कुछ दिन के लिए होती है। एक सामान्य गिटार का दाम 10,000 रुपये से शुरू होता है। जबकि कुछ दिन के लिए किराये पर उन्हें यह 1,500-2,000 रुपये में मिल जाएगा।

उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसे तकनीकी क्षेत्रों में विद्यार्थियों को हर सेमेस्टर में अलग किताबों की जरूरत होती है। ये किताबें आम तौर पर काफी महंगी होती हैं और सेमेस्टर के बदलते ही वे इस्तेमाल से बाहर हो जाते हैं। यदि इस तरह की किताबें उन्हें अपेक्षित समय के लिए किराये पर उपलब्ध हो जाए तो वे इन्हें खरीदने की बाध्यता से बच जाएंगे।

शर्मा ने कहा कि छात्रों की जरूरत को ध्यान में रखकर ग्रेटर नोएडा में फुलफिलमेंट केंद्र भी बनाया गया है। इसकी वजह यह है कि ग्रेटर नोएडा आज कॉलेज हब बन चुका है जहां लाखों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, पेइंग गेस्ट के रूप में रह रहे हैं।  इस नई पहल के वित्तपोषण के बारे में पूछे जाने पर शचिन्द्र ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों के मामले में हमने वित्तपोषण आंतरिक संसाधनों से किया है और हमारा यह उद्यम ढाई साल पहले ही मुनाफे में आ चुका है। इसके अलावा वित्तपोषण के लिए हमारी बातचीत हो रही है।  

By Ankit Dubey

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