सर्दी में यूं रखें बुजुर्गों का ध्यान

ठंड का मौसम में बुजुर्गों को कुछ खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस मौसम में हृदय रोग, हाइपोथर्मिया, फ्लू और दमा के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे में अगर आप के घर में बुजुर्ग व्यक्ति हैं तो जानें उनकी केयर कैसे करें।

हृदय रोग
वैसे तो हृदय रोग किसी को कभी भी हो सकता है पर सर्दी में खासकर बुजुर्गों को लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए।


लक्षण
दोनों हाथों, कमर, गर्दन, जबड़े या फिर पेट और बेचैनी महसूस हो सकती है। सांस फूलना और सूजन आना, लेटने पर खांसी आना और सीने में दर्द होना।
सावधानियां
ऐसे लक्षण दिखने पर शीघ्र ही डॉक्टर की सलाह ले। हृदय और गुर्दे के रोगी तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही ले। खानपान में सावधानी बरतें, तली चीजों का परहेज करें। हृदय रोगों के लिए नियमित जांच कराएंं। सांस फूलने, बांये कंधे, हाथ या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

हाइपोथर्मिया

इस मौसम में बुजुर्गों को हाइपोथर्मिया होने का खतरा भी रहता है। इसका मतलब शरीर का तापमान कम हो जाना। लापरवाही बरतने पर यह समस्या जानलेवा हो सकती है।


लक्षण
शरीर का ठंडा पड़ जाना, बेसुध होना, हृदय गति का धीमा पडऩा।


सावधानियां
बाहर जाने के पहले ऊनी कपड़े पहनें, एक या दो मोटे कपड़े पहनने के बजाय कई लेयर वाले पतले कपड़े पहने। बीमार या बुजुर्ग ज्यादा ठंड में बाहर जाने से बचें। गर्म पदार्थ का सेवन अधिक करें।

दमा
बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याएं कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। तापमान में गिरावट, कोहरा, प्रदूषण या वायरल इंफेक्शन के कारण सांस की समस्याएं ज्यादा होती हैं।


लक्षण
सांस फूलने के साथ सांय-सांय की आवाज आना, पीला सफेद बलगम आना, खांसी का बढ़ जाना, रात को नींद ना आना, सुस्ती आना।


सावधानियां
जितना हो सके गर्म कपड़े पहने व कान ढक कर रखें। खाने में हल्दी, अदरक, तुलसी , काली मिर्च और केसर आदि लें।

फ्लू
फ्लू यह एक प्रकार के वायरस के कारण होने वाली बीमारी है। बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए वह संक्रमण से जल्दी प्रभावित होते हैं। ऐसे में सर्दी के मौसम में लापरवाही न बरते।

लक्षण
तेज बुखार और बदन दर्द, सिर दर्द और गले में दर्द, खांसी आना और सांस लेने में समस्या होना।

सावधानियां
फ्लू के रोगी खांसते या छींकते समय मुंह पर हाथ रखें या रूमाल का प्रयोग करें। फ्लू के रोगियों द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं जैसे रूमाल व चादरों को सुरक्षित विधि से साफ करें। मौसम में बदलाव से पहले हर साल फ्लू का टीका लगवाएं। तरल पदार्थ लेते रहें।

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