सावधान! दूषित खाद्य पदार्थ के खाने से बढ़ जाते हैं फूड पॉइजनिंग के मामले

गर्मियों में फूड प्वॉइजनिंग के मामले काफी बढ़ जाते हैं। इसे खाद्य जनित बीमारी यानी ‘फूड बोर्न इलनेस’ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें दूषित खाद्य पदार्थों के खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। संक्रमित जीव जैसे बैक्टीरिया, वायरस तथा परजीवी आदि से दूषित किए गए भोजन का सेवन करना फूड पॉइजनिंग का प्रमुख कारण है। संक्रामक जीव या उनके विषाक्त पदार्थ खाद्य सामग्री को उत्पादन करने से बनाने तक किसी भी समय दूषित कर सकते हैं ।

कमजोर इम्यूनिटी के कारण इन्हें खतरा
फूड पॉइजनिंग की समस्या में दूषित खाने का असर व्यक्ति की उम्र, सेहत और संक्रामक जीवों के प्रकार व संक्रमण की मात्रा पर निर्भर करता है। इनमें रोग का खतरा अधिक हो जाता है।

छोटे बच्चे
रोग प्रतिरोधक क्षमता पूर्ण रूप से विकसित न होने से इनमें किसी भी प्रकार के संक्रमण की आशंका दोगुनी हो जाती है। इसलिए इनमें रोग का खतरा रहता है।

वृद्धावस्था
इनके शरीर में युवावस्था की तुलना में मौसमी और संक्रामक रोगों के विरुद्ध काम करने की क्षमता कम व उनकी चपेट में आने की संभावना अधिक होती है। इनके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी सबसे ज्यादा खतरा होता है।

किसी रोग से पीडि़त मरीज
डायबिटीज, लिवर संबंधी रोग और एड्स जैसी बीमारियों से ग्रसित लोगों में भी फूड प्वॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। इसके अलावा जो लोग कैंसर के इलाज के लिए कीमोथैरेपी तथा रेडिएशन थैरेपी लेते हैं या ले रहे हैं उनमें कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण रोग हो सकता है। सावधानी और बचाव ही इलाज का रूप है।

प्रमुख लक्षण
उल्टी, मितली, पेट में दर्द के साथ ऐंठन, दस्त, बुखार, कमजोरी महसूस होना और चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती हैं।

रोग के कारण
फूड पॉइजनिंग की समस्या के लिए निम्न तीन कारण प्रमुख रूप से सामने आते हैं। जानते हैं इनके बारे में-

बैक्टीरिया
फूड पॉइजनिंग के लिए बैक्टीरिया बहुत प्रचलित कारणों में से एक है। इसमें ई-कोलाई, लिक्टेरिया, साल्मोनैला आदि समस्या को फैलाने वाले सबसे मुख्य बैक्टीरिया हैं।

परजीवी
इनसे फूड पॉइजनिंग होना बैक्टीरिया की तरह सामान्य बात नहीं है। लेकिन भोजन के माध्यम से फैले परजीवी बेहद खतरनाक हो सकते हैं। ये पाचनतंत्र में सालों तक रह सकते हैं जिनकी पहचान थोड़ी मुश्किल होती है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और गर्भवती महिलाओं की आंतों में परजीवी के कारण काफी मात्रा में नुकसान पहुंचता है।

वायरस
फूड पॉइजनिंग की समस्या वायरस के कारण भी हो सकती है। इसके लिए नोरो वायरस सबसे आम होता है। इसके अलावा सेपोवायरस, रोटावायरस और एस्ट्रो वायरस फूड पॉइजनिंग की समस्या को पैदा करते हैं। लिवर को प्रभावित करने वाला हेपेटाइटिस-ए तथा ई भी एक गंभीर बीमारी है जो वायरस के कारण भोजन के जरिए फैलती है।

ऐसे होता है इलाज
फूड पॉइजनिंग का उपचार बीमारी के लक्षणों की गंभीरता को देखकर किया जाता है। ज्यादातर लोगों में समस्या बिना किसी इलाज के कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। कई बार दवाएं भी ली जाती हैं।

शरीर में पानी की कमी
इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स जैसे सोडियम, पोटैशियम तथा कैल्शियम जो शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखते हैं। कई बार दस्त के कारण शरीर में इनकी कमी हो जाती है। कुछ मामलों में बच्चे, गर्भवती महिला और वयस्क आदि को उल्टी होने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। यहां आईवी फ्लूड के जरिए पानी की कमी पूरी करते हैं। सामान्य अवस्था में ओआरएस देते हैं।

एंटीबायोटिक्स
बैक्टीरिया के कारण यदि फूड प्वॉइजनिंग की समस्या हुई है जिससे कि मरीज की अवस्था गंभीर हो जाती है, ऐसे में उन्हें एंटीबायोटिक्स दवाएं देते हैं। लिक्टेरिया तथा अन्य बैक्टीरिया के संक्रमण की अवस्था में डिहाइड्रेशन में रोगी को अस्पताल में भर्ती कर इन्ट्रावेनस एंटीबायोटिक्स से इलाज करते हैं। समस्या का इलाज जितना जल्दी हो उतना ही बेहतर रहता है।

बचाव
गर्मियों में अधिक तापमान के कारण भोजन जल्दी खराब होता है, ऐसे मेें शुद्ध व ताजा पका हुआ भोजन लें।
भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल करें।
मार्केट में मिलने वाले खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज करें।
भोजन करने से पहले हाथ अच्छे से साबुन से धोएं।
दूध तथा अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स गर्मियों में जल्दी खराब होते हैं। इन्हें कम तापमान पर फ्रिज में रखें।

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