गर्मी के मौसम में महिलाओं में होने लगती है अक्सर ये 3 समस्याएं, ऐसे रखें ध्यान

गर्मी का मौसम शुरू होते ही पारे ने उफान मारना शुरू कर दिया है। क्या आप जानते है इस मौसम में महिलाओं को किस तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इस आर्टिकल में हम आपको उन बीमारियों के बारे में बताएंगे जो गर्मी के मौसम में अक्सर महिलाओं में देखने को मिलती है। गर्मी में तापमान बढ़ने से असंतुलन और कुछ जरूरी पदार्थों की कमी होने लगती है और हम बीमार हो जाते है।

माहवारी में हो सकती है अनियमितता
गर्मी बढऩे से महिलाओं के दिमाग का हाइपोथैलमस हिस्सा प्रभावित होता है। गौर हो हाइपोथैलमस से माहवारी नियंत्रित होती है जैसे पीरियड्स का समय, रक्तस्राव और कब माहवारी बंद होनी है। इसमें पेट दर्द, आलस, कमजोरी, थकान होती है। आराम के लिए महिला या लडक़ी का शीत गुण संतुलित करते हैं। इस मौसम में डॉक्टर महिलाओं को छाछ, नारियल पानी, खीरा, ककड़ी खाने की सलाह देते हैं।

बढ़ जाती है गर्भपात की आशंका
प्रकृति में उष्मगुण बढऩे से गर्भपात का खतरा अधिक हो जाता है। इसमें पेट में भारीपन के साथ दर्द, अचानक रक्तस्राव होना प्रमुख लक्षण हैं। गर्भपात से बचाव के लिए सत्त् शौत घृत प्रक्रिया के तहत पेट पर मेडिकेटेड घी लगाते हैं। शतावरी चूर्ण देते हैं और ज्यादा आराम करने की सलाह दी जाती है।

गर्मी से बढ़ता समय पूर्व प्रसव का खतरा
गर्मी से शरीर की क्रिया में बदलाव होते हैं। गर्भवती महिला के भीतर जैसे ही ये बदलाव होंगे उसे समय से पहले उसके प्रसव पीड़ा शुरू हो जाएगी। अगर प्रसव 37 सप्ताह से पहले हो गया तो शिशु के फेफड़ों का विकास नहीं हो पाता है जिससे उसे सांस लेने में परेशानी होती है। गर्मी की वजह से समय पूर्व प्रसव से बचाने के लिए गर्भवती महिला को जीवन्ती, दूध के साथ शतावरी खाने और पेट पर मेडिकेटेड घी लगाने की सलाह दी जाती है।

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