UN: पीला बुखार को जड़ से खत्म करने का शुरू हुआ अभियान

यूएन के समर्थन में शुरू किया गया यह अभियान अफ्रीका में 2026 तक करीब एक अरब लोगों को इससे निजात दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेडरोस अदोनोम गिबरेयसस ने कहा, "एक इंजेक्शन इस खतरनाक रोग के लिए काफी है। इससे किसी भी इस रोग से ग्रसित व्यक्ति का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। यह बात उन्होंने Eliminate Yellow Fever Epidemics (EYE) की लॉचिंग के दौरान कही। बता दें कि नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में अफ्रीकी स्ट्रेटजी के तहत इस महामारी के खिलाफ अभियान की शुरुआत की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य 2026 तक इस जानलेवा बीमारी से महाद्वीप को निजात दिलाना है। टेडरोस का दावा है कि इस अभियान के बाद अफ्रीका इस बीमारी से पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा।

डब्लूएचओ के अनुसार, पश्चिम अफ्रीका का अनुभव यह दर्शाता है कि EYE स्ट्रेटजी "काम कर सकती है।" गोयाकि 2000 के दशक के शुरुआती दिनों में जब पीला बुखार एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरा था, तब इस क्षेत्र में नियमित प्रतिरक्षण के साथ संयोजित जन अभियान के माध्यम से महामारी को नियंत्रित किया गया था।

vaccine की आपूर्ति..
इस अभियान को सफल बनाने में vaccine की पर्याप्त आपूर्ति का होना खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इतने बड़े लेवल पर vaccine पूरे अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां और विश्व बैंक के अलावा सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थाएं एक साथ मिलकर vaccine की आपूर्ति में सुधार के लिए काम ? कर रही हैं।

क्या है पीला बुखार...
येलो फीवर ( पीत ज्वर - पीला बुखार ) विषाणु द्वारा उत्पन्न एक तीव्र हेमोरेजिक ( क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनियों में रक्त प्रवाह होने वाला ) रोग है, जो मनुष्यों में संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। रोग के नाम में येलो शब्द पीलिया को इंगित करता है, जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है। यह ऐसा रोग है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है।

लक्षण...

अलग अलग अवस्थाओं में येलो फीवर अलग अलग लक्षण पैदा करता है। येलो फीवर के कुछ मुख्या लक्षण इस प्रकार हैं-

-बुखार
-सर दर्द
-मुंह, नाक, कान, और पीट में रक्त स्राव (खून का बहना)
-उलटी, मितली, जी मचलाना
-लिवर और किडनी से सम्बंधित कार्य प्रणाली का ठप पड़ना
-पेट में दर्द
-पीलिया (जौंडिस)

इलाज...
आश्चर्य की बात यह है कि हर साल येलो फीवर से संक्रमित करीब 50 प्रतिशत लोग इसके संक्रमण से मर जाते हैं। लेकिन इससे vaccine के द्वारा पूरी तरह बचा जा सकता है। येलो फीवर के संक्रमण से बुखार, सर दर्द और उलटी (मितली) जैसे लक्षण पैदा होते हैं। गंभीर स्थितियों में यह ह्रदय, लिवर और किडनी से सम्बंधित जानलेवा लक्षण पैदा कर सकते हैं।

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