world breastfeeding week 2018 : मां के दूध से कम होती है एलर्जी की आशंका

अमरीकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, मां को कम से कम छह माह तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए। नवजात शिशु को शुरुआती छह माह मां का दूध मिले तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उन्हें कई स्वास्थ्य रक्षक विटामिन व पोषक तत्त्व मिल जाते हैं। नवजात शिशु को स्तनपान करवाने से मां भी स्वस्थ रहती है।

रोगों से बचाव


चिकित्सकीय अनुसंधान का निष्कर्ष है कि जिन बच्चों को मां का दूध मिलता है, उनके आमाशय में वायरस, श्वसन संबंधी रोग, कान के इंफेक्शन और मेनिनजाइटिस जैसे रोगों का खतरा घट जाता है। वयस्क होने पर ऐसे बच्चे डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और पेट के रोगों से भी बचते हैं।

एलर्जी से बचाव


नवजात शिशु के लिए वरदान है मां का दूध। जिन बच्चों को जन्म के बाद बाहर का दूध मिलता है, उनके एलर्जिक होने का खतरा ज्यादा रहता है। मां के दूध से शिशु के इंटेस्टाइन का बचाव होता है और वे कई किस्म की एलर्जी से बच जाते हैं। सन् 2009 में प्रकाशित एक जर्मन अध्ययन के अनुसार स्तनपान नवजात शिशु की मृत्यु दर घटाता है।

बुद्धिमत्ता में वृद्धि


कई शोध में यह बात सामने आई है कि स्तनपान बौद्धिक विकास से जुड़ा है। 17 हजार से ज्यादा नवजात शिशुओं की छह साल तक निगरानी की गई। पता चला कि इनमें से जिन बच्चों को मां का दूध मिला था, उनका आईक्यू स्कोर और बुद्धिमत्ता स्तर उन बच्चों से बेहतर है, जिन्होंने शुरुआती छह माह स्तनपान नहीं किया।

विशेषज्ञों का कहना है, स्तनपान से मां व बच्चे के बीच जो भावनात्मक लगाव बढ़ता होता है, जो शिशु का मानसिक विकास करता है। मां के दूध में लाभकारी फैटी एसिड्स भी होते हैं।

मोटापे से बचाव


पीडियाट्रिक्स अकादमी के अनुसार, मां का दूध बच्चे को मोटा होने से बचाता है। अमरीकन जर्नल ऑफ एपिडिपयोलॉजी में प्रकाशित अध्ययनों का निष्कर्ष है कि स्तनपान करने वाले बच्चों के लिए उम्र या युवावस्था में अधिक वजन बढऩे का खतरा कम होता है।

मां का तनाव घटाए


नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ के अध्ययन का निष्कर्ष है कि जो मां बच्चों को स्तनपान नहीं करवाती या जल्दी बंद कर देती है, उनके लिए प्रसवोत्तर अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। स्तनपान करवाने के बाद मां को सुखद अनुभूति होती है। इसका बायोलॉजिकल कारण है हार्मोन ऑक्सीटोसिन का रिलीज हो जाना।

कैंसर की आशंका कम


जो महिलाएं लंबे समय तक स्तनपान कराती हैं, उनमें ब्रेस्ट व पेट के कैंसर का खतरा घट जाता है। इसका कारण अभी तक नहीं खोजा जा सका है, लेकिन मान्यता है कि स्तनपान से ब्रेस्ट टिश्यू बदलते हैं। शरीर जो एस्ट्रोजन पैदा करता है, उनकी लोकेशन बदलती है।

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