Arthritis:: कब और किन लोगों को करवाना चाहिए जोड़ प्रत्यारोपण, यहां जानें

अक्सर थोड़ी सी भी परेशानी होने पर लोग जोड़ प्रत्यारोपण का सहारा लेने लगते हैं, जो भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है। ऐसे में प्रत्यारोपण के दौरान, इससे पहले और बाद में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए, गौर करें। विशेषज्ञ रोगी से बात करने और मेडिकल हिस्ट्री जानने के बाद ही प्रत्यारोपण का फैसला लेते हैं। यदि रोगी पार्किंसन, किसी इंफेक्शन और मांसपेशियों से जुड़े रोग से पीडि़त है, तो किसी भी तरह का जोड़ प्रत्यारोपण कराने से बचें।

आर्थराइटिस की शुरुआती अवस्था में दवाओं, जोड़ों की चिकनाई बढ़ाने वाले इंजेक्शन और स्टेम सेल थैरेपी की मदद ली जाती है। यदि स्थिति गंभीर होती है, तो जोड़ प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है। लेकिन यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि जोड़ प्रत्यारोपण के बाद मरीज को यह कभी नहीं सोचन चाहिए कि वह पूरी तरह से ठीक हो गया है। जोड़ प्रत्यारोपण के बाद लावरवाही नहीं, सावधानी बरतने की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। यदि मरीज जरा-सी लापरवाही की, तो मान के चलिए कि जोड़ प्रत्यारोपण की नौबत दोबारा आ सकती है।

जोड़ प्रत्यारोपण में नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। घुटने के प्रत्यारोपण में 40 से 80 मिनट ही लगने चाहिए। इससे कम एवं ज्यादा समय परिणाम को प्रभावित करते हैं। साथ ही जोड़ की संरचना के अनुसार जोड़ लगवाना चाहिए।

सावधानी बरतें
- प्रत्यारोपण के बाद कम से कम 4-5 बार फॉलोअप चेकअप जरूर करवाएं।
- ऊबड़-खाबड़ वाली जगह पर चलने की बजाय समतल जगह पर चलें वर्ना चोट लग सकती है।
- शरीर का वजन नियंत्रित रखें। साथ ही किसी भी प्रकार के संक्रमण में लापरवाही न बरतें। तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं।
- उम्र बढऩे के साथ हड्डियों का कमजोर होना स्वाभाविक है। ऐसे में कंप्लीट बोन हैल्थ चेकअप के साथ सही इलाज लें। ताकि कमजोर हड्डियों से प्रत्यारोपित जोड़ अलग न हो सके। कैल्शियम युक्त चीजें जैसे दूध व दही खाएं।
- प्रत्यारोपण के बाद अक्सर जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके लिए जोड़ के हल्के-फुल्के मूवमेंट के साथ कसरत भी जरूरी है।

डॉ. बीआर बगडिय़ा सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, जयपुर

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