स्क्रब टाइफस: बिना खुजली वाले चकत्तों से रहें सावधान

टाइफस एक प्रकार का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो पिस्सुओं (कीट) के काटने से होता है। इसकी शुरुआत तेज बुखार, ठंड, बेहोशी छाना, शरीर, तेज सिरदर्द, उल्टी आदि डेंगू-चिकनगुनिया जैसे लक्षण होना है, लेकिन स्क्रब टाइफस में बिना खुजली वाले गोल चकत्ते शरीर पर दिखाई देते हैं। ये पिस्सुओं के काटने से होते हैं। ऐसे लक्षण डेंगू-चिकनगुनिया, मलेरिया में नहीं दिखते हैं। इन्हें देखकर भी पहचान हो सकती है। इसमें प्लेट्स के साथ ब्लड काउंट भी तेजी से घटता है।


स्क्रब टाइफस में ये जांचें जरुरी
स्क्रब टाइफस होने पर कुछ जांचें डॉक्टर्स करवाते हैं। इसमें प्लेटलेट्स काउंट, सीबीसी, लिवर फंक्शन और किडन फंक्शन टेस्ट करवाई जाती हैं। बीमारी की गंभीरता के आधार पर अन्य जांचें जैसे एलाइजा व इम्यूटी से जुड़े टेस्ट भी करवाते हैं। इसमें मुख्य रूप से 7-10 दिन तक एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं।


इलाज में देरी से दूसरे अंगों पर असर
इलाज समय पर न होने से इसका असर ब्रेन, हार्ट, किडनी और फेफड़ों पर भी पड़ता है। मल्टी ऑर्गन फेल्योर का खतरा भी रहता है। सांस लेने में तकलीफ के साथ निमोनिया हो जाता है। मरीज को वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है। इसमें देरी होने पर मरीज की जान जाने की आशंका रहती है।


ऐसे करें बचाव
यह बीमारी शहरों में काम देखने को मिलती है लेकिन बरसात के मौसम में यहां पर भी देखने को मिलती है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारी है, क्योंकि इसके कीट खेतों, जंगलों और झाड़ियों में रहते हैं। यहां पर पिस्सू बड़ी संख्या में रहते हैं। यहां काम करने वाले या वहां जाने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है. ऐसे में वहां जाने से बचें। यदि जा रहे हैं तो शरीर पर पूरे कपड़े हों। त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए माइट रिपेलेंट क्रीम लगाएं। जिन क्षेत्रों में यह समस्या है वहां प्रिवेंटिव दवा ले सकते हैं।
डॉ. अरविंद पालावत, सीनियर फिजिशियन, सवाई मानसिंह हॉस्पिटल, जयपुर

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