हर तीन माह में मौसम परिवर्तन और शरीर की तासीर के अनुसार तेल

हैल्दी-ऑयल
खाद्य पदार्थों को ज्यादा फ्राइ करने से बचें। ग्रिलिंग करें। मौसमी तेल का प्रयोग भी प्रभावी होता है। विशेषज्ञ के अनुसार हर तीन माह में मौसम, शरीर की प्रकृति और तासीर के अनुसार तेल बदलते रहना चाहिए।

मूंगफली : सर्दियों में आयरन, जिंक, विटामिन-ई युक्त तेल को कफ व वात प्रकृति के लोग खा सकते हैं।
फायदा : कोलेस्ट्रॉल, बीपी नियंत्रित करता है। त्वचा, अल्जाइमर में भी फायदेमंद है।
तिल : बारिश में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए,बी,सी से युक्त तेल दोनों तासीर के साथ वात, पित्त प्रकृति के लोग खा सकते हंै।
फायदा : भूख की कमी, मेनोपॉज, कमजोरी, लकवा, डायबिटीज, बाल संबंधी समस्या में लाभकारी है। निमोनिया, अस्थमा रोगियों को तिल के तेल के साथ सेंधा नमक डालकर गुनगुना होने पर छानकर मालिश करें।
सरसों : बारिश के मौसम में प्रोटीन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ई और कैल्शियम से भरपूर इस तेल को गर्म तासीर के साथ ही कफ प्रकृति के लोग खा सकते है।
फायदा : यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। त्वचा, बाल, पाचन तंत्र संबंधी, सायनस में लाभकारी है। कफ, त्वचा संबंधी समस्या में तेल को उबाल लें। ठंडा कर मालिश करनी चाहिए।
जैतून : कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम व विटामिन युक्त तेल गरम तासीर के साथ कफ व वात प्रकृति के लोग खाएं।
फायदा : कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रखने के अलावा तेल कैंसर के खतरे को कम। मधुमेह, हाइ बीपी, त्वचा, अल्जाइमर और डिमेंशिया में लाभकारी है।
घी : पोषक तत्व और कैलोरी युक्त ठंडी तासीर के साथ वात व पित्त प्रकृति के लोग खा सकते हैं। दिन में दो से चार छोटी चम्मच लें।
फायदा : कमजोर हृदय और लो बीपी के रोगियों के लिए घी लाभकारी है। पढने वालों और अधिक मानसिक परिश्रम करने वालों के लिए गाय का घी लाभकारी है। कठोर परिश्रमी के लिए भैंस का घी लाभकारी है।

तनाव और त्वचा में फायदेमंद
सोयाबीन तेल : प्रोटीन, विटामिन ए, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त होता है।
फायदा : हार्ट अटैक की आशंका कम करता है। तनाव, त्वचा, हड्डी सम्बन्धी, शुगर में फायदेमंद है।
नारियल तेल : गर्मियों में विटामिन ए, सी, डी, कैल्शियम, आयरन युक्त तेल वात, पित्त प्रकृति के लोग खा सकते है।
फायदा - कोलेस्ट्रॉल सही रखने के अलावा यह तेल पाचन तंत्र, हड्डियों को मजबूत करता है।

गर्म तेल का दोबारा प्रयोग न करें
बार-बार तेल गर्म करने से उसके मुख्य तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। जितनी बार तेल गर्म होता है, उसमें फ्री रेडिकल्स बनते हैं। इनके रिलीज होने से तेल में एंटी ऑक्सीडेंट खत्म हो जाते हैं। हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इस तेल के इस्तेमाल से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढऩा, हृदय, एसिडिटी, गले संबंधी रोग और अल्जाइमर, पार्किसंस होने की आशंका रहती है। फिर से फ्राइ करने के लिए भी प्रयोग नहीं करें।

मात्रा से अधिक लेने पर होती दिक्कत
सरसों का तेल को मात्रा के अनुसार प्रयोग करें। सीमित मात्रा से अधिक खाने पर त्वचा और रक्त सम्बन्धी समस्याएं हो सकती गर्भवती और एलर्जी वाले डॉक्टरी सलाह से इसका प्रयोग करें। इसके अलावा जैतून का तेल सीमित मात्रा से अधिक खाने पर रक्तचाप में गिरावट, वजन बढना और गुर्दे व पाचन संबंधी समस्या हो सकती है।

रिपोर्ट : राशि बिश्नोई


डॉ. गिरधर गोपाल शर्मा
आयुर्वेद विशेषज्ञ
शिवा बिश्नोई
न्यूट्रिशन कंसल्टेंट

Post a comment

0 Comments