हाइपोथैलमस से प्रेग्नेंसी पर असर, तनाव, अत्यधिक व्यायाम भी कारण

जयपुर. प्रेग्नेन्सी के काल मे आपकी मानसिक तथा इमोशनल गतिविधियों मे बदलाव आते रहते हैं इस तरह से गतिविधियों के घटने तथा बढ़ने के पीछे हॉर्मोनल फ्लक्चुएशन होता है। हाइपोथैलमस मस्तिष्क से जुड़ी परेशानी है जो पिट्यूटरी ग्लैंड (पीयूष ग्रंथि) को नियंत्रित करती है। यह पिट्यूटरी ग्लैंड को नियंत्रित करती है, खासकर तनाव की स्थिति में। तनाव, अत्यधिक व्यायाम और अपर्याप्त पोषण मस्तिष्क तक संकेत पहुंचने में बाधा पहुंचाते हैं। मस्तिष्क को पूरा पोषण नहीं मिलता है। एथलीट, डांसर्स और जिन महिलाओं का फैट का स्तर काफी कम है उन्हें भी यह दिक्कत आती है। यह अनुवांशिक, असामान्य पीरियड्स और अंडाशय के सही काम नहीं करने से होता है। इस से स्वाद, स्पर्श, दबाव, गर्मी, ठंड और दर्द जैसे संवेदी जानकारी से जुड़े उदर नाभिक नाभिक होते हैं।

आयरन की अधिकता भी कारण

खाने से अरुचि होना या एनोरेक्सिया, रक्तस्राव, बूलीमिया, अनुवांशिक गड़बड़ी, सिर पर चोट, संक्रमण और सूजन होने पर, पर्याप्त पोषण न मिल पाना, रेडिएशन या विकिरण, सर्जरी, आयरन की अधिकता।

बीपी की दवा बाधक

कुछ गर्भनिरोधक गोलियां, इंजेक्शन भी कारण हो सकते हैं। कई बार गर्भनिरोधक गोलियों को बंद करने के बाद हो सकता है। कुछ खास प्रकार की दवाएं जैसे तनाव और ब्लड प्रेशर के लिए ली जाने वाली दवाएं हॉर्मोन के स्तर को बढ़ा सकती हैं। डिंब उत्सर्जन में दिक्कत करती हैं। मासिक चक्र को भी प्रभावित करती है। हाइपोथैलेमस शरीर के वजन में के प्रति बहुत संवेदनशील है। यदि आप एक हफ्ते से भी कम समय में कुछ किलोग्राम खो देते हैं, तो सावधान हो जाइये।

दिनचर्या में परिवर्तन

स्त्री रोग एवं आइवीएफ विशेषज्ञ डॉ. अलका ने बताया कि जीवनशैली में बदलाव, अधिक व्यायाम न करें। वजन नियंत्रित रखें। फर्टिलिटी की दवाओं से डिंब उत्सर्जन और मासिक चक्र बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इन महिलाओं में आइवीएफ उपयोगी है। खाने में गेहूं के आटे की चपाती बंद करके जौ और चने के आटे की चपाती लेना शुरू करें। जौ और चने में कार्बोहाइड्रेट पदार्थ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।

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