जेट एयरवेज में इसलिए निकला यात्रियों के नाक, कान से खून

जेट एयरवेज के विमान में गुरुवार करीब ३० यात्रियों के नाक और कान से खून बहने लगा था और तेज सिरदर्द की समस्या सामने आई थी। विमान के अंदर इस तरह की समस्या के लिए पूरी तरह से केबिन क्रू की लापरवाही जिम्मेदार है। ऐसा विमान में एयर प्रेशर कंट्रोल न होने के कारण हुआ। इसके पीछे पूरी साइंस है, जिसे आपको समझने की जरूरत है।

इसलिए जरूरी है विमान में एयर प्रेशर कंट्रोल

ज्यादातर विमान धरती से १५ से ३० हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। फ्लाइट के उड़ान भरने के साथ ही कैबिन के अंदर हवा का दबाव कम होने लगता है। ऐसे में विमान में मौजूद ब्लीड स्विच बहुत काम आता है। इसे स्विच के जरिए कैबिन में हवा के दबाव को सामान्य रखा जाता है। टरबाइन आसमान से ऑक्सिीजन को कंप्रेस कर अंदर लाते हैं और ब्लीड वॉल्व बंद कर इसे अंदर स्टोर कर लिया जाता है। अगर ये वॉल्व खुले रह जाएं, तो ऑक्सीजन वापस बाहर निकलने लगती है।

विमान के अंदर हवा के दवाब को सामान्य रखना इसलिए जरूरी है ताकि यात्री और चालक दर को सांस लेने में परेशानी न हो। विमान के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं रखे जा सकते, लिहाजा विमान के इंजन से जुड़े टरबाइन आसमान में मौजूद ऑक्सीजन को कंप्रेस कर अंदर लाते हैं। इंजन से होकर गुजरने के कारण हवा का तापमान अधिक हो जाता है, ऐसे में कूलिंग तकनीक के जरिए इसे ठंडा किया जाता है।

प्रेशर कम होने से यह होती है समस्या

विमान में हवा का दवाब कम होने पर सांस लेने में परेशानी होती है। हवा में नमी कम हो जाने के कारण बार बार प्यास लगती है। स्वाद लेने और सूंघने की क्षमता भी तीस फीसदी तक घट जाती है। इसके अलावा हमारे शरीर में रक्त के बहाव में नाइट्रोजन की मात्रा बढऩे लगती है, जिससे जोड़ों में दर्द, लकवा और मौत तक हो सकती है।

विमान में होती है ऑटोमेटिक कैबिन प्रेशर मशीन

आमतौर पर विमान में दो ऑटोमेटिक कैबिन प्रेशर मशीन ऑक्सीजन के दबाव को नियंत्रित रखने का काम करती हैं। एक मशीन सामान्य तौर पर काम करती है, जबकि दूसरी आपात स्थिति में काम में ली जाती है। इसके अलावा एक गैर स्वचालित मोटर होती है। दोनों ऑटोमेटिक मशीनें बंद होने पर इस मोटर का इस्तेमाल किया जाता है।

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